लघुकथा 

लघुकथा 

            'वह' अनमना सा  कहीं से आकर पार्क की बेंच पर बैठ गया था। 

'वह' बहुत नाराज़ दिखाई पड़ रहा था। कुछ अपने से कुछ दुसरो से भी। 

उसे सिर में दर्द तो नहीं था। फिर भी वह बार बार माथे को दबा रहा था। 

उसने कोई विशेष दवाईयां भी नहीं  ली थी। 

उसके सारे कार्य में हाथों की भूमिका अहम थी। ख़ासतौर पर उंगलियां। 

लोगों ने कहा : "किसी 'वायरस' का प्रकोप है।" 

उदय श्री ताम्हणे 

भोपाल मध्यप्रदेश भारत 

 




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