लघुकथा : दारुण
लघुकथा
दारुण
उदय श्री. ताम्हणे
पर्व विशेष पर भव्य हवन समारोह का आयोजन किया गया था ! बड़े -बड़े हवन कुंड बनाये गये थे !
पंडित जी महाराज लगातार मंत्रोच्चार कर रहे थे ! जजमान जोड़ो मे बैठ कर हवन कुंड मे आहुतियाँ डाल रहे थे !
ॐ स्वाहा की ध्वनि गूंज रही थी ! वातावरण मे सुगंध फैलती जा रही थी !
सहसा मंत्रोच्चार का स्वर धीमा हुआ ! विद्धुत कर्मी लपका उसने माइक्रोफोन मे कुछ किया आवाज फिर बढ़ गयी !
पंडाल मे ऊर्जा बढ़ गयी थी ! जो आहुतियाँ नहीं डाल पाये थे, वे लालायित थे ! स्वाहा ! स्वाहा ! स्वाहा ! की तरंगो के साथ हवन निर्विध्न सम्पन्न हुआ !
अब जोड़े अपने स्थान से उठने लगे थे ! कोई पानी की जुगाड़ मे था, कोई कमर सीधी कर रहा था, कोई पैरो की झुन - झुनी हटा रहा था !
तभी कई चीखे गूंजी! कुछ बच्चे हवन कुंड के पास खेल रहे थे, और उनमे से एक बच्चा हवन मे गिर गया था !
सुरक्षा कर्मी दौड़े उन्होने बच्चे को बाहर निकाला और डाक्टर के पास ले गये ! डाक्टर ने जवाब दे दिया था !
उदय श्री ताम्हणे
भोपाल मध्यप्रदेश भारत

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