लघुकथा
कन्यादान
विवाह तो दो आत्माओं का मिलन होता है, जो जीवनपर्यंत हर सुख-दुख में साथ निभाते हैं, फिर इसमें कन्यादान जैसी रस्म का औचित्य क्यों...?
शुभ मुहूर्त निकला जा रहा है, पंडित जी की आवाज़ में अब रोष झलकने लगा था।
पंडित जी, आप अपने रीति-रिवाज निभाएं, उससे पूर्व मैं अपनी एक शर्त रखना चाहता हूँ, बड़ो-बुजुर्गों की तरफ बिना देखे ही आकाश निःसंकोच बीच में बोल पड़ा।
दुल्हे के मुँह से ऐसा सुनते ही मेहमानों से भरा मंडप सूई पटक सन्नाटे में परिवर्तित हो गया। ठंड में ठिठुरते हुए बदन से पसीने की बूँदे छलकने लगीं।
बेसुध से होते पिता को भाई ने सहारा दिया और हिम्मत करके पूछा-
"बताओ क्या चाहिए तुमको, जो अब इस समय पर तुमको अपनी शर्त याद आयी?"
माँ-पिता की दयनीय स्थिति अब स्वरा से भी नही देखी जा पा रही थी। मंडप की बेदी से उठने के लिए उसके पाँव बेताब हो रहे थे। लेकिन फेरों के लिए बँधा दुपट्टा आकाश के हाथ में लिपटा था।
उसे देखकर भाई ने अब सब्र खो दिया और जोर से चिल्लाकर बोला- "मेरी बहन का दुप्पटे से गाँठ छोड़ो और बताओ तुम्हारी क्या शर्त है?"
रात खत्म हो रही थी, सभी का चेहरा शंका-कुशंकाओं के बर्फ से ढँका हुआ ठंडा पड़ा था, तभी सूर्य की किरणों की तरह चमकता हुआ चेहरा लिए आकाश मुस्कुराता हुआ उठा और स्नेहपूर्ण हाथों से अपनी दुल्हन के माँग में सिंदूर भरते हुए बोला-
"पिताजी! मेरी सिर्फ़ इतनी सी शर्त है, कि अब आप अपनी बेटी का कन्यादान नही करेंगे, तभी मैं इसे अपने साथ लेकर जाऊँगा। आप लोग पुण्य प्राप्ति के लिए, अपनी ही संतान का कन्या-दान कर देते हैं, बेटियाँ क्या दान की कोई वस्तु होती हैं...!?"
डाॅ. क्षमा सिसोदिया
उज्जैन
परिचय-
डॉ. क्षमा सिसोदिया-
अंतरराष्ट्रीय कवियित्री, लघुकथाकार, हास्य-व्यंग्य एवं त्वरित घटनाओं पर स्वतंत्र लेखिका।
सांदीपनि काॅलेज और विक्रम वि.वि. में अध्यापन कार्य।
स्नातक - इलाहाबाद वि. वि.
स्नातकोत्तर - लखनऊ वि. वि.
पीएचडी - विक्रम वि. वि.
इन्टीरियर - डिप्लोमा कोर्स
इंडस्ट्रियल- डिप्लोमा कोर्स।
1-देवी अहिल्या वि. वि. में गवर्नर
नामिनी कार्यपरिषद की भूतपूर्व सदस्य।
2-"रेकी थैरेपी" गवर्नर द्वारा गोल्डमेडल प्राप्त।
3- लखनऊ वि. वि. से उत्कृष्ट छात्रा के रूप में
"मिस हिन्दी"अवार्ड प्राप्त।
4-प्राइमरी क्लास में सुदाम नाटक में अभिनय पुरस्कार।
5-छात्र जीवन से ही लेखन में रूझान और समाचार-पत्रों में लेखन।
6--आकाशवाणी पर कई बार कविता पाठ।
7--महाकवि कालिदास-स्मृति समारोह समिती उज्जयिनी द्वारा सम्मानित।
8--नीरजा सारस्वत सम्मान।
9-- हिंदी साहित्य सम्मेलन सम्मान।
10-अभिव्यक्ति विचार मंच नागदा द्वारा सम्मान।
11-अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर,
दैनिक भास्कर, पत्रिका, नई दुनिया, अग्निपथ इत्यादि समाचारपत्रों द्वारा सम्मानित।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लघुकथा और कविता प्रतियोगिता में विजेता पुरस्कार प्राप्त।
विशेष :-
प्रकाशित पुस्तकें निम्न है।
1-" केवल तुम्हारे लिए" (काव्य संग्रह)
2-"कथा- सीपिका" (लघुकथा संग्रह)
3-"भीतर कोई बंद है (लघुकथा संग्रह)
4-तीन अन्य विधा की पुस्तकें प्रकाशनार्थ।
स्थाई पता-
आशीर्वाद
डाॅ.क्षमा सिसोदिया
10/10 सेक्टर बी महाकाल वाणिज्य केन्द्र
उज्जैन-456010 (म.प्र)
मोबाइल नं-9425091767

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