लघुकथा : धन्ना का पडौसी

 लघुकथा 

धन्ना का पड़ोसी 


     सब्जीवाला आ....$.... ये आवाज़ सुनकर धन्ना अपनी बालकनी में आकर खड़ा हो जाता है। 

     धन्ना उससे सब्ज़ी तो नहीं लेता पर थोड़ा उसका मनोरंजन  हो जाता है। 

धन्ना का पड़ोसी जोशी अक्सर उससे सब्ज़ी खरीदता है। 

    प्याज की तरह गोभी, भिंडी, मटर और टमाटर के भाव भी कम तो नहीं थे, वैसे भी मोल भाव तो करना ही है। सो धन्ना के पड़ोसी ने पूछा गोभी -मटर कैसे दिए। सब्ज़ीवाले ने कहा ६० रूपये किलो। धन्ना के पड़ोसी ने कहा अबे क्या सरकार की तरह तू भी टैक्स लगाकर हमे लूटेगा। ३० रूपये किलो देना हो तो दे वर्ना चलता हो। सब्जी वाला गिड़गिड़ाया साहब २५ किलोमीटर से गाडीभाडा देकर सब्ज़ी लाता हूं। इतना कम में तो नहीं पुरायेगा। पडौसी बोला ३५ रूपये से ऊपर १ रुपया न दूंगा। सब्जी न बिकी तो घर की रोटी कैसे बनेगी सो सब्जी वाला मन गया। पड़ोसी ने एक -एक किलो गोभी, मटर और टमाटर अच्छे छांटकर तुलवा लिए। १०५ रूपये हुए। पड़ोसी ने १०० रूपये का नोट सब्जीवाले के हाथ पर रख दिया कहा छुट्टे नहीं है ५ रूपये बाद में लेना। सब्जीवाला रवाना हो गया। 

   धन्ना का पडौसी धन्ना की और मुखातिब हुआ कल रात लौटने में देर हो गई। मार्किट से सब्जी नही ले पाये। दोस्त के साथ पार्टी थी। पिज्ज़ा की प्लेटों पर ३०० - ३०० खर्च हुये। धन्ना मुस्कराया। 

  धन्ना गुनगुना रहा था - हम बोलेगा तो बोलोगे के बोलता है, जोशी पड़ोसी कुछ भी बोले हम कुछ नहीं बोलेगा।  



उदय श्री ताम्हणे 

भोपाल मध्यप्रदेश भारत 







टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

लघुकथा : दारुण